एक्सीडेंट में हो गए थे लंगूर की हड्डियों के 5 टुकड़े, MP में पहली बार इस टेक्नीक से हो रहा है ऑपरेशन

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एक्सीडेंट में हो गए थे लंगूर की हड्डियों के 5 टुकड़े, MP में पहली बार इस टेक्नीक से हो रहा है ऑपरेशन

सड़क हादसे में लंगूर के हाथ-पैर की हड्डियों को 5 टुकड़े हो गए थे। लंगूर की जान बचाने स्कूल ऑफ वाइल्ड लाइफ फॉरेंसिक एंड हेल्थ के डॉक्टरों ने इंटरलॉकिंग मेलिंग टेक्नीक से लंगूर के पैर का सफल ऑपरेशन किया।

जबलपुर. मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित नानाजी देशमुख पशु चिकित्सालय एवं यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों ने एक मादा लंगूर को नया जीवन देने के लिये नई तकनीक के साथ उसका ऑपरेशन किया है। बताया जा रहा है कि, एक सड़क हादसे में लंगूर के हाथ और पैर की हड्डियों को 5 टुकड़े हो गए थे, जिसके बाद से लंगूर की जान बचाने के लिए स्कूल ऑफ वाइल्ड लाइफ फॉरेंसिक एंड हेल्थ के डॉक्टरों ने इंटरलॉकिंग मेलिंग (हड्डी के अंदर राड डालकर बाहर से स्क्रू कसना) से लंगूर के पैर का सफल ऑपरेशन किया है। आपको बता दें कि, ये मध्य प्रदेश में किसी जानवर का इस तरह का पहला ऑपरेशन है।

चिकित्सकों का कहना है कि, अगले 5 दिन बाद हाथ की टूटी हुई हड्डियों का ऑपरेशन भी इसी तरह किया जाएगा। डॉक्टरों ने उम्मीद जताई है कि, एक महीने के भीतर ही मादा लंगूर पहले की तरह सेहतमंद होकर उछल-कूद कर सकेगा। बता दें कि, नरसिंहपुर जिले की वन विभाग टीम को गुजिश्ता 1 सितंबर को ये मादा लंगूर घायल अवस्था में मिली थी। करीब 10 वर्ष की इस मादा लंगूर की हाथ की हड्डी दो टुकड़ों में और बाएं पैर की हड्डी 3 टुकड़े हो गए थे। वन विभाग की टीम का मानना है कि, जंगल से सड़क पर आने के दौरान किसी वाहन से टकराने के कारण मादा लंगूर के साथ ये घटना घटी होगी।

 

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शरीर में था महज 6 फीसद हीमोग्लोबिन

लंगूर के ऑपरेशन के लिए वेटरनरी डॉक्टरों को एक हफ्ता तो सिर्फ इसलिये इंतजार करना पड़ा, क्योंकि, उसके शरीर में हीमोग्लोबिन मात्र 6 फीसद ही मौजूद था, इसे 10.4% बढ़ाने के लिए डॉक्टरों ने उसे एक सप्ताह तक रोजाना अनार का रस, नारियल पानी, केले समेत अन्य हीमोग्लोबिन बढ़ाने वाली डाइट दी। तब कहीं जाकर 8 सितंबर बुधवार को लंगूर के पैर का ऑपरेशन संभव हो सका। 4 घंटे चले इस ऑपरेशन में डॉक्टरों ने लंगूर के पैर की टूटी हड्‌डी को रॉड डालकर स्क्रू से कस दिया है। डॉक्टर अगले पांच दिन बाद लंगूर के हाथों का ऑपरेशन करेंगे।

 

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जान बचाना मुश्किल लग रहा था

मादा लंगूर का ऑपरेशन करने वाली टीम की डॉक्टर सदस्य शोभा जवारे के अनुसार, हफ्ते भर पहले जब लंगूर को वेटरनरी लाया गया था, उस समय उसकी हालत देखकर लग रहा था कि, इसे बचा पाना संभव नहीं। वो दर्द से कराह रही थी। वेटरनरी के डॉक्टर रणधीर सिंह, डॉ. बबीता दास, डॉ. अतराशाही, डॉ. निधि राजूपत, डॉ. माधुरी भैरकर के साथ पीजी के छात्रों की टीम ने लगातार उसकी देखभाल कर उसे ऑपरेशन के लायक बनाया। अब वो पूरी तरह से स्वस्थ है, उसने खाना-पीना भी शुरू कर दिया है। अगले एक महीने के भीतर वो दोबारा उछल-कूद करने लगेगी।

 

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