उपेंद्र कुशवाहा की सीएम नीतीश से मांग, कहा- जदयू को मंजूर नहीं तेजस्वी यादव, खत्म करें आरजेडी वाली डील

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उपेंद्र कुशवाहा की सीएम नीतीश से मांग, कहा- जदयू को मंजूर नहीं तेजस्वी यादव, खत्म करें आरजेडी वाली डील

उपेंद्र कुशवाहा की सीएम नीतीश से मांग, कहा- जदयू को मंजूर नहीं तेजस्वी यादव, खत्म करें आरजेडी वाली डील


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जदयू नेता उपेंद्र कुशवाहा ने बुधवार को पार्टी नेतृत्व पर ही सवाल खड़े कर दिए। जदयू के राष्ट्रीय और प्रदेश अध्यक्ष ने उन्हे पार्टी का प्राथमिक सदस्य से ज्यादा और कुछ नहीं बताया था। जिस पर उन्होने कहा कि प्राथमिक सदस्य बनकर वो खुश हैं। लेकिन सीएम नीतीश कुमार उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव को राज्य की बागडोर दे रहे हैं। ‘गुप्त सौदा’ न तो उन्हें स्वीकार्य होगा और न ही पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं और न ही बिहार की जनता को। नीतीश कुमार के सीएम बनने से पहले के दौरे के बारे में सोचो। अगर ऐसा होता है तो जदयू को डूबने से कोई नहीं बचा सकता। 

जदयू को मंजूर नहीं ‘गुप्त सौदा’

नीतीश जी ने 2005 से पहले राज्य को उस भयावह स्थिति से बाहर निकालने के लिए बहुत मेहनत की थी। और इसे दोहराया नहीं जा सकता है। पार्टी को तभी बचाया जा सकता है जब डील का मुद्दा हमेशा के लिए खत्म हो जाए और मुझे छोड़कर पार्टी के भीतर सामाजिक न्याय में विश्वास रखने वाले किसी भी नेता को पेश किया जाए। जदयू में कई सक्षम नेता हैं।

कुशवाहा ने अपने हमले को जारी रखते हुए कहा कि कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं को छोड़कर पार्टी के अधिकांश नेता और कार्यकर्ता परेशान हैं। उन्होंने कहा, ‘समस्या यह है कि मुख्यमंत्री को भी अपनी मनमानी नहीं करने दी जा रही है। सच तो यह है कि नीतीश जी जो चाहते हैं, वह नहीं कर पा रहे हैं। अगर उन्होंने अपने फैसले खुद लिए होते, तो उन्होंने इतनी मेहनत से बनाए बिहार को कभी भी उथल-पुथल के एक और दौर में नहीं जाने दिया होता। 2005 से पहले की स्थिति को कौन भूल सकता है और यह नीतीश कुमार की क्षमता थी, जिसने राज्य को निराशा से बाहर निकाला।

बीजेपी कर रही कुशवाहा को सपोर्ट

कुशवाहा ने कहा कि यह अहम नहीं है कि वह एक साधारण प्राथमिक सदस्य के रूप में पार्टी में रहेंगे, लेकिन पार्टी के लोगों और उसके कार्यकर्ताओं की इच्छा के मुताबिक कार्य करना चाहिए। हालांकि भाजपा खुले तौर पर कुशवाहा के साथ किसी भी मौन समझौते को स्वीकार नहीं कर रही है, जिसकी ओर नीतीश कुमार और अन्य जदयू नेता इशारा करते रहे हैं, लेकिन बीजेपी कुशवाहा के तर्कों का समर्थन करने में भी पीछे नहीं है।

बीजेपी प्रवक्ता अरविंद कुमार ने कहा कि अगर नीतीश कुमार तेजस्वी को अपना नेता स्वीकार करते हैं, तो इससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण बात नहीं हो सकती है। उन्हें अपने उत्तराधिकारी के लिए जेडीयू के भीतर से किसी की तलाश करनी चाहिए, वो भी एक ईबीसी या दलित नेता। कुशवाहा एक वरिष्ठ नेता हैं और वह कुछ भी गलत नहीं कह रहे हैं।

क्या होगा कुशवाहा का अगला कदम?

अपनी ही पार्टी पर लगातार हमले करने वाले कुशवाहा के बयानों को नीतीश कुमार लगातार खारिज करते रहे हैं और कहा कि इस तरह के बयानों से कोई फर्क नहीं पड़ेगा, जदयू मजबूत हो रहा है। वहीं कुशवाहा ने 19-20 फरवरी को पटना में पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक भी बुलाई है। उन्होंने यहां तक ​​कहा कि जदयू स्वर्गीय शरद यादव द्वारा बनाई गई पार्टी है, नीतीश कुमार ने नहीं, जिन्होंने समता पार्टी बनाई थी। जदयू में उपेंद्र कुशवाहा पर जारी घमासान फिलहाल तो थमने  का नाम नहीं ले रहा है। ऐसे में देखना होगा कि अब कुशवाहा का अगला कदम क्या होगा। 

 

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