उपकर, अधिभार की कटौती का दुरुपयोग रोकने के लिए किया गया संशोधन: सीतारमण

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उपकर, अधिभार की कटौती का दुरुपयोग रोकने के लिए किया गया संशोधन: सीतारमण

नयी दिल्ली, 25 मार्च (भाषा) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कहा कि उपकर एवं अधिभार के एवज में किए जाने वाले कटौती के दावे से संबंधित पिछली तिथि से संशोधन का उद्देश्य इस प्रावधान का दुरुपयोग रोकना है। यह खासकर उन लोगों के लिये है, जो इसे छूट या कारोबार खर्च के रूप में देखते रहे हैं।

वित्त विधेयक में अधिभार या उपकर के लिए कटौती की अनुमति पर रोक आकलन वर्ष 2005-06 से लागू करने का प्रस्ताव रखा गया था।

लोकसभा में वित्त विधेयक में संशोधन को दी गई स्वीकृति के मुताबिक, उपकर या अधिभार के एवज में कटौती के लिए किया गया कोई भी दावा ‘कम बताई गई आय’ माना जाएगा और वह 50 फीसदी जुर्माने का हकदार होगा।

सीतारमण ने लोकसभा में वित्त विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि करों पर लगने वाले उपकर एवं अधिभार का वर्षों से ‘दुरुपयोग’ होता आया है और लोग इसे छूट या कारोबारी खर्च के तौर पर लेते रहे हैं।

उन्होंने कहा, “यह काफी उलझाने वाला बिंदु रहा है और इस पर लोग अदालतों में भी गए हैं। इसलिए पिछली तारीख से लागू होने वाले प्रभाव के साथ एक संशोधन लाया गया है ताकि अधिक स्पष्टता आए।”

वित्त मंत्री ने इस संशोधन की वजह से करदाताओं पर किसी तरह का बोझ न पड़ने का जिक्र करते हुए कहा कि अगर करदाता खुद ही कटौती के रूप में बताई गई राशि का खुलासा कर अधिकारियों के सामने करते हैं तो उन पर कोई जुर्माना नहीं लगेगा।

उन्होंने कहा, “अगर करदाता खुद ही इसकी जानकारी देता है तो उस पर कोई जुर्माना नहीं लगेगा।” करदाता की आय का नए सिरे से आकलन किया जाएगा जिसके बाद वैध कर का भुगतान किया जा सकता है।’’

वित्त मंत्री ने वित्त विधेयक में 39 संशोधनों का प्रस्ताव रखा था जिन्हें लोकसभा ने ध्वनि मत से मंजूरी दे दी। इनमें क्रिप्टो करेंसी पर कराधान को लेकर नियम सख्त करने से संबंधित संशोधन भी शामिल है।

वित्त वर्ष 2022-23 के बजट ने क्रिप्टो करेंसी से होने वाली आय पर कर लगाने पर स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है। एक अप्रैल, 2022 से क्रिप्टो करेंसी की लेन-देन से होने वाली आय पर 30 प्रतिशत की दर से आयकर लगने के अलावा उपकर एवं अधिभार भी लगाए जाएंगे।

इसके अलावा साल भर में 10,000 रुपये से अधिक डिजिटल मुद्रा के भुगतान पर एक फीसदी की दर से स्रोत-पर-कर (टीडीएस) लगाने का भी प्रस्ताव रखा गया है। टीडीएस का प्रावधान एक जुलाई, 2022 से लागू होगा जबकि लाभ पर कर एक अप्रैल, 2022 से ही लागू होगा।

क्रिप्टो करेंसी पर जतायी गयी चिंता के बारे में सीतारमण ने कहा कि इस डिजिटल मुद्रा के बारे में नियमन को लेकर परामर्श जारी है। तबतक सरकार ने डिजिटल मुद्रा से होने वाले लाभ पर 30 प्रतिशत की दर से कर लगाने का निर्णय किया।

संशोधनों के तहत निर्यात-आयात आंकड़ों के प्रकाशन के संदर्भ में जुर्माना प्रावधान को भी हल्का किया गया है।

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