इंदौर से 55 किमी दूर 2 सेनाओं के बीच हुआ युद्ध, जमकर चले बारूद से भरे गोले | Indore: War between 2 armies, gunpowder-filled shells fired fiercely | Patrika News

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इंदौर से 55 किमी दूर 2 सेनाओं के बीच हुआ युद्ध, जमकर चले बारूद से भरे गोले | Indore: War between 2 armies, gunpowder-filled shells fired fiercely | Patrika News

देखते ही देखते दोनों ओर से रॉकेट की तरह चलने वाले हिंगोट की बरसात हो गई । जलते हिंगोट से एक-दूसरे पर वार होने लगे। लगभग 1 घंटे 20 मिनट चले इस युद्ध में दोनों ओर से आग बरसाती रही। गोलियों की तरह चले हिंगोट कभी ढाल से टकराकर कभी जमीन से टकराकर दर्शकों की ओर भी रुख कर लिया। दिशा भटक कर जो हिंगोट दर्शकों के बीच गिरता सनसनी फैलता गया जैसे-जैसे अंधेरा होता गया वैसे रोमांच बढ़ता गया। सनसनाते हिंगोट की चपेट में योद्धाओं के हिंगोट के भरे झोले भी चपेट में आ गए। हिंगोट की चपेट में आने से जब-जब झोले जले मैदान पर बैठे दर्शक रोमांचित हो गए।

दरअसल हिंगोट नामक एक फल होता है, जो हिंगोरिया नामक पेड़ पर होता है, इस फल के अंदर बारूद भर दिया जाता है, उसमें बत्ती लगा देते हैं, फिर उसे युद्ध के दौरान तीर की तरह चलाया जाता है, वहीं दूसरा पक्ष इससे बचने के लिए ढाल का सहारा लेता है, वह ढाल से खुद का बचाव करता है वहीं हिंगोट चलाकर दूसरे पक्ष पर वार करता है, ये युद्ध सालों से चला आ रहा है, जिसमें दोनों पक्ष एक दूसरे पर वार करते हैं, लेकिन अंत में न कोई जीता न कोई हारा के रूप में युद्ध समाप्त हो जाता है, इस युद्ध के दौरान कई लोग घायल भी होते हैं। ये युद्ध तुर्रा और कलंगी दो गुटों के बीच होता है। जिसे देखने के लिए प्रदेश के कई जिलों से लोग भारी संख्या में पहुंचते हैं, इस दौरान सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस प्रशासन भी व्यवस्था करता है। वहीं घायलों को तुरंत अस्पताल या उपचार देने के लिए भी सुविधा रहती है।

बुधवार को गौतम ऋषि की पावन नगरी गौतमपुरा में सदियों से चला आ रहा भाईचारे से खेले जाने वाला रोमांचकारी हिंगोट युद्ध का आयोजन हुआ। एक बार फिर बिना प्रचार-प्रसार के बावजूद प्रदेश के कई शहरों से हजारों की संख्या में दर्शक हिंगोट युद्ध देखने पहुंचे।

देवनारायण जी दर्शन के बाद युद्ध हुआ प्रारंभ

दोपहर के 2 बजे से अन्य शहरों से दर्शकों का आवागमन शुरू हो गया। युद्ध देखने का उत्साह इतना था कि 4 बजे ही पूरा हिंगोट मैदान दर्शकों से भर गया। हिंगोट युद्ध लड़ने वाले दोनों दल के योद्धा ढोल-धमाकों के साथ जुलूस के रूप में अलग-अलग बड़नगर रोड स्थित देवनारायण भगवान के मंदिर पहुंचे । दर्शन के बाद योद्धाओं ने मैदान के लिए कूच किया। स्थानीय व बाहर से आए हजारों दर्शकों की उपस्थिति में सिर पर साफा, एक हाथ में ढाल, अग्निबाण से भरा हुआ झोला कंधे पर लटकाए योद्धा मैदान पर उतरे तो दर्शक रोमांचित हो गए। पूरा मैदान ताली की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। शुरुआत में 50 से 60 योद्धा आमने-सामने थे। योद्धा में उत्साह इतना था कि बिना संकेत मिल 4.30 बजे हिंगोट युद्ध प्रारंभ कर लिया। 4.45 बजे युद्ध को रोक दिया क्योंकि बहुत से योद्धा मैदान पर नहीं पहुंचे थे। 5 बजे फिर दोबारा संकेत मिलते ही हिंगोट युद्ध प्रारंभ हुआ।

उत्साह के साथ खेला गया युद्ध

हिंगोट युद्ध भाई चारे के साथ खेला गया । युद्ध के दौरान मैदान के अंदर व बाहर कई घटनाएं हुई। जिसका आनंद दर्शकों ने भरपूर उठाया। हमेशा की तरह योद्धा के साथ दर्शक भी घायल हुए। इस वर्ष 46 लोग मामूली घायल हुए । जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे गई । अंत में 20 हजार से अधिक दर्शकों की मौजूदगी में दोनों दल के योद्धाओं ने ना हम जीते ना तुम हारे के साथ युद्ध की समाप्ति हुई।

कड़े बंदोबस्त के बीच हुआ हिंगोट युद्ध

हिंगोट युद्ध के लिए प्रशासन कई दिनों से तैयारी कर रहा था । दर्शकों को चोट न लगे इसके लिए इस बार जालियों की ऊंचाई डबल कर दी गई। युद्ध मैदान के अंदर थाना प्रभारी अरुण कुमार सोलंकी पूरे समय पुलिस बल के साथ कमान संभाले हुए थे। वहीं मैदान के बाहर एसडीएम रवि वर्मा पूरे प्रशासनिक अमले के साथ नजर रखे हुए थे। डॉक्टर सुनील असाटी व डॉक्टरों की टीम के साथ मैदान पर तैनात 4 एंबुलेंस में घायलों का प्राथमिक उपचार किया। वहीं नगर परिषद टीम हर सुविधा दर्शकों को मुहिम कराई।

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नेताओं ने एक मंच पर आकर पेश की मिसाल

हिंगोट युद्ध के लिए राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता छोड़कर कांग्रेस-भाजपा के नेता एक मंच पर पहुंचकर योद्धाओं का हौसला अफजाई करी। मंच पर विधायक विशाल पटेल पूर्व विधायक मनोज पटेल दुग्ध संघ के पूर्व अध्यक्ष उमरावसिंह मौर्य, जिला पंचायत उपाध्यक्ष भारत पटेल, जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधि गुमानसिंह पंवार सहित कई नेता मंच पर मौजूद थे ।



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