आरक्षण विरोधी ताकतों ने जातिगत गणना पर लगवाई रोक, BJP भी मजबूरी में कर रही समर्थन : शिवानंद तिवारी

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आरक्षण विरोधी ताकतों ने जातिगत गणना पर लगवाई रोक, BJP भी मजबूरी में कर रही समर्थन : शिवानंद तिवारी

आरक्षण विरोधी ताकतों ने जातिगत गणना पर लगवाई रोक, BJP भी मजबूरी में कर रही समर्थन : शिवानंद तिवारी

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बिहार में जातिगत गणना पर पटना हाईकोर्ट की रोक के बाद आरजेडी के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने आरक्षण विरोधी ताकतों पर तीखी टिप्पणी की है। तिवारी ने कहा कि हाईकोर्ट में जातीय गणना का विरोध करने वाला संगठन यूथ फॉर इक्विलिटी पिछड़ों के आरक्षण के खिलाफ है। बीजेपी इस स्टे से खुश है, वह मजबूरी में जातीय गणना का समर्थन कर रही है। उन्होंने उच्च न्यायपालिका में आरक्षण व्यवस्था लागू नहीं करने पर भी सवाल उठाए। बता दें कि पटना हाईकोर्ट ने गुरुवार को जातिगत गणना पर रोक लगाने का अंतरिम आदेश जारी किया था।

पूर्व सांसद एवं आरजेडी नेता शिवानंद तिवारी ने शुक्रवार को बयान जारी कर कहा कि जातीय जनगणना पर हाईकोर्ट के फैसले पर बीजेपी जश्न क्यों मना रही है। क्या वह मजबूरी में जातीय सर्वेक्षण का समर्थन कर रही थी। बीजेपी ने कभी भी मन से पिछड़ों के आरक्षण का समर्थन नहीं किया है। वीपी सिंह सरकार द्वारा मंडल आयोग की अनुशंसा के आधार पर केंद्र सरकार की नौकरियों में आरक्षण के प्रावधान के विरोध में बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी ने राम रथ निकाला था. 

तिवारी ने कहा कि जातीय गणना के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट और उसके बाद हाईकोर्ट में विरोध करने वाला ‘यूथ फ़ॉर इक्विलिटी’ पिछड़ों के आरक्षण का विरोध करने वाले युवाओं का संगठन है। आर्थिक आधार पर 10 प्रतिशत आरक्षण के विरोध में भी इस संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इसका कहना था कि सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को दिया जाने वाला आरक्षण अलग से नहीं बल्कि पिछड़ों को दिए जाने वाले 27 प्रतिशत आरक्षण के भीतर दिया जाना चाहिए। शिवानंद ने कहा कि पटना हाईकोर्ट ने आरक्षण विरोधी इसी युवा संगठन की मांग को मंजूर करते हुए बिहार सरकार के दूसरे चरण की जातीय गणना पर फिलहाल रोक लगा दी है।

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आरजेडी नेता ने कहा कि जातियों में बुरी तरह विभक्त हमारे समाज में तटस्थ दृष्टिकोण अपवाद है। हमारे समाज के इस गंभीर रोग को ही ध्यान में रखते हुए उच्च न्यायपालिका में भी आरक्षण लागू किए जाने की मांग बहुत दिनों से की जा रही है। 2001 में ही करिया मुंडा की अध्यक्षता में गठित भारतीय संसद की संयुक्त संसदीय समिति ने उच्च न्यायपालिका में जजों की नियुक्ति में आरक्षण की सशक्त अनुशंसा की थी। उन्होंने सवाल किया कि बीजेपी अगर जाति व्यवस्था को देश के लिए अभिशाप मानती है तो क्या वह उच्च न्यायपालिका में सामाजिक असंतुलन को दूर करने के लिए करिया मुंडा समिति की अनुशंसा के अनुसार उच्च न्यायपालिका में भी आरक्षण का समर्थन करती है?

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