आगरा : 1982 में बच्चे को किडनैप कर किया था मर्डर, 40 साल बाद गांव में फैमिली से मिलने आए आरोपी को पुलिस ने किया अरेस्ट

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आगरा : 1982 में बच्चे को किडनैप कर किया था मर्डर, 40 साल बाद गांव में फैमिली से मिलने आए आरोपी को पुलिस ने किया अरेस्ट

आगरा : 1982 में बच्चे को किडनैप कर किया था मर्डर, 40 साल बाद गांव में फैमिली से मिलने आए आरोपी को पुलिस ने किया अरेस्ट

आगरा: वर्ष 1982 में एक बच्चे की हत्या करने वाला अंतराम 40 साल से दिल्ली में नाम बदलकर रह रहा था। बीते सोमवार को जब वह अपने गांव में परिवारवालों से मिलने पहुंचा तो पुलिस को खबर लग गई और उसे दबोच लिया। पुलिस ने अंतराम को जेल भेज दिया है। अंतराम ने अपने साथी के साथ मिलकर आगरा में अधिवक्ता के 7 साल के मासूम का अपहरण कर लिया था। फिरौती नहीं मिलने पर उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपी को मफरूर घोषित कर दिया था, लेकिन उसकी तलाश बंद नहीं हुई थी।

अंतराम उर्फ अंता की उम्र अब 60 साल है। अंतराम ने अपने साथी चंद्रपाल के साथ मिलकर खेरागढ़ कस्बे ऊंटगिरी चौराहा के पास रहने वाले अधिवक्ता नाहर सिंह के 7 साल के बेटे हरेंद्र का 1982 में अपहरण किया था। परिवार से 5 लाख की फिरौती मांगी गई थी। आगरा के खेरागढ़ थाना प्रभारी राजीव सोलंकी ने बतताया कि अंतराम उर्फ अंता और चंद्रपाल उर्फ चंदा अधिवक्ता नाहर सिंह के पड़ोस में ही रहते थे।

दोनों ने अधिवक्ता के बेटे का अपहरण कर लिया था। अपहरण के 7 दिन बाद हरेंद्र का शव आगरा में खिन्नी के बाग से बरामद हुआ था। पुलिस ने दबिश देकर चंदा को गिरफ्तार कर लिया और उसे जेल भेज दिया था। मगर अंता का कोई पता नहीं चल सका था। अंता को पकडऩे के लिए पुलिस ने कई जगहों पर दबिशें दीं, लेकिन वह हाथ नहीं लग सका था। अंता के घर की कुर्की भी हो चुकी थी।

20 साल की उम्र में किया था जुर्म

थाना प्रभारी ने बताया कि अंता फर्जी आधार कार्ड बनवा लिया था। वह दिल्ली में श्रीनिवास के नाम से रह रहा था। दिल्ली में रहकर अंता राममिस्त्री का काम करता था। दिल्ली में उसने शादी कर ली और उसकी दो बेटी और एक बेटा भी है। थाना प्रभारी ने बताया कि जब उसने अधिवक्ता के बच्चे की हत्या की तो अंता की उम्र 20 वर्ष थी और चंदा की 19 साल। मफरूर घोषित होने के बाद चार्जशीट लगा दी और स्थायी वारंट भी जारी कर दिया था। पुलिस ने बताया कि 1996 से उसे किसी ने देखा नहीं था। अब 60 साल की उम्र में अंता जेल गया है।

पेरौल पर छूटा चंदा का भी नहीं पता

पुलिस ने बताया कि हत्या के आरोप में कोर्ट ने चंदा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। संजा के खिलाफ चंदा ने हाईकोर्ट में अपील की थी। 1983 चंदा को पेरौल पर जमानत मिल गई। पेरौल मिलने के बाद वह भी फरार हो गया। पुलिस के अनुसार उसकी गिरफ्तारी के लिए कोर्ट से वारंट जारी हो रहे हैं। पुलिस जब भी चंदा के घर जाती है तो उसके घरवाले यही कहते हैं कि वह मर चुका है।

ऐसे पकड़ा गया अंता

पुलिस ने बताया कि अंता के चार भाई हैं। दो भाई आगरा के खेरागढ़ में ही रहते हैं और एक भाई पप्पू दिल्ली में रहता है। इधर हरेंद्र के पिता नाहर सिंह की मौत हो चुकी है। हरेंद्र के बड़े भाई राघवेंद्र अंता के परिवार पर नजर बनाए रखता है। राघवेंद्र ने पुलिस ने पप्पू के बारे में जानकारी दी थी। पुलिस ने पप्पू पर सर्विलांस से नजर रखी थी। इससे सुराग मिला था। सोमवार को जब अंता अपने परिवार से मिलने के लिए गांव आया तो पुलिस ने दबिश देकर उसे पकड़ लिया।

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