अखिलेश राजनैतिक रूप से अपरिपक्‍व, सपा का विधायक हूं, विधानमंडल से निकाल देते…चिट्ठी पर शिवपाल का पलटवार

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अखिलेश राजनैतिक रूप से अपरिपक्‍व, सपा का विधायक हूं, विधानमंडल से निकाल देते…चिट्ठी पर शिवपाल का पलटवार

लखनऊः समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव की ओर से चाचा शिवपाल यादव को लिखी चिट्ठी पर जवाब आया है। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के प्रमुख शिवपाल ने मंगलवार को कहा कि अखिलेश के पत्र ने राजनैतिक अपरिपक्वता का प्रमाण दिया है। इसमें औपचारिक स्वतंत्रता दी गई है जबकि इससे अच्छा होता कि वह हमें विधानमंडल और पार्टी से निकाल देते। बता दें कि बीते दिनों सपा की ओर से शिवपाल को एक चिट्ठी भेजी गई थी, जिसमें कहा गया था कि उन्हें (शिवपाल को) जहां सम्मान मिलता है, वे वहां जा सकते हैं।

सपा विधायक और प्रसपा मुखिया शिवपाल यादव ने कहा कि 2022 के विधानसभा चुनाव में मैंने प्रगतिशील समाजवादी पार्टी से इस्तीफा देकर समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी। उसके बावजूद सपा की बैठक या विधानमंडल दल की बैठक में मुझे कभी नहीं बुलाया गया। उन्होंने कहा कि मुझसे कहा गया कि आप गठबधंन में हैं जबकि मुझे किसी ने गठबधंन में देखा नहीं। न ही हम कभी गठबधंन में गए। मैं समाजवादी पार्टी का विधायक हूं।

जिसने हमसे वोट मांगा उसको दियाः शिवपाल
उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव को लेकर कहा कि न तो मुझे बैठक में बुलाया गया और न ही कोई सूचना दी गई, इसलिये मैंने फैसला लिया कि जो भी हमसे वोट मांगेगा, उसको हम वोट करेंगे। शिवपाल ने कहा कि मुख्यमंत्री जी के वहां से हमे बुलावा आया था। वहां द्रौपदी मुर्मू जी से परिचय कराया गया। उन्होंने हमसे वोट मांगा तो हमने द्रौपदी मुर्मू जी को वोट दिया और वो विजयी हुईं। वहीं विपक्ष उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को सपा के समर्थन पर उन्होंने कहा कि जो कट्टर समाजवादी होगा वो नेता जी का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगा।

शिवपाल यादव ने किया ट्वीट
इससे पहले शिवपाल यादव ने सपा के उस पत्र पर पलटवार करते हुए ट्वीट के माध्यम से अपना जवाब दिया था। शिवापल ने अपने ट्वीट में लिखा- मैं वैसे तो सदैव से ही स्वतंत्र था, लेकिन समाजवादी पार्टी द्वारा पत्र जारी कर मुझे औपचारिक स्वतंत्रता देने हेतु सहृदय धन्यवाद। शिवपाल ने कहा कि राजनीतिक यात्रा में सिद्धांतों और सम्मान से समझौता अस्वीकार्य है।

सपा की ओर से लिखा गया पत्र
शनिवार को समाजवादी पार्टी की ओर से सपा विधायक और प्रसपा मुखिया शिवपाल यादव के नाम एक पत्र लिखा गया था जिसमें कहा गया कि अगर आपको लगता है, कहीं ज्यादा सम्मान मिलेगा तो वहां जाने के लिए आप स्वतंत्र हैं।’ इसी तरह सुभासपा प्रमुख ओपी राजभर के नाम भी एक पत्र जारी हुआ था जिसमें उनको नसीहत देते हुए कहा गया था कि ओम प्रकाश राजभर जी, समाजवादी पार्टी लगातार भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ लड़ रही है। आपका बीजेपी के साथ गठजोड़ है और लगातार बीजेपी को मजबूत करने का काम कर रहे हैं। अगर आपको लगता है कि कहीं ज्यादा सम्मान मिलेगा तो वहां जाने के लिए आप स्वतंत्र हैं।’

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रिपोर्टः अभय सिंह

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